राउरकेला, 30 जून
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) के समावेश पर मंथन के लिए बीजू पटनायक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (बीपीयूटी) में मंगलवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में ओडिशा के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के 200 से अधिक प्राचार्य और वरिष्ठ शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं।
बीपीयूटी के कुंतला कुमारी साबत सभागार में आयोजित कार्यशाला का विषय ‘विकसित ओडिशा के लिए तकनीकी शिक्षा का रूपांतरण : एनईपी-2020 परिप्रेक्ष्य’ है। इसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करना और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सुझाव तैयार करना है।
उद्घाटन सत्र में बीपीयूटी के कुलपति प्रो. आर्य कुमार रथ ने कहा कि भारत प्राचीन काल में विश्व शिक्षा का प्रमुख केंद्र था, जहां दुनिया भर से विद्यार्थी और विद्वान ज्ञान अर्जित करने आते थे। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़कर ही एनईपी-2020 के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।
ओडिशा सरकार के कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव सुकांत कुमार प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यशाला से पाठ्यक्रम में इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्य अतिथि एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि भारत का विश्वगुरु के रूप में गौरव उसकी समृद्ध ज्ञान परंपरा पर आधारित रहा है। आधुनिक तकनीकी प्रगति और भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय उच्च शिक्षा को अधिक सशक्त, नवोन्मेषी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाएगा।
कार्यशाला की शुरुआत संयोजक डॉ. देवाश्रीत दास के स्वागत भाषण से हुई, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती निशिपूर्णा मिंज ने दिया।
दो दिवसीय कार्यशाला में देश के कई प्रमुख शिक्षाविद भारतीय ज्ञान परंपरा और तकनीकी शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान देंगे। इनमें गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. रज्जुल के. गज्जर, जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रभात महापात्र, आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रो. श्रीपद करमालकर, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिल रंजन गर्ग, एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव, धरणीधर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार पात्र तथा एनआईटी नागालैंड के निदेशक प्रो. ए. इलायापेरुमल प्रमुख रूप से शामिल हैं।
आयोजकों के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों और ऐसे पाठ्यक्रम से परिचित कराना है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा का संतुलित समन्वय हो। इससे ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है।
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