
राहुल गुप्ता/कुसमी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में करीब 68 करोड़ 90 लाख 78 हजार रुपये की लागत से बनाए गए 221 छोटा नाला चेक डैम निर्माण सह नाला बेड डीसीलटिंग कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार गहराते जा रहे हैं। पूर्व में फर्जी मस्टर रोल तैयार कर बिना डीसीलटिंग मजदूरी भुगतान के आरोप सामने आए थे, वहीं अब जमीनी निरीक्षण में निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव, सामग्री आपूर्ति और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर द्वारा वर्ष 2022-23 में स्वीकृत इन कार्यों का निर्माण विभागीय स्तर पर कराया गया था। जानकारी के अनुसार उप संभाग शंकरगढ़ में 116 तथा कुसमी में 105, कुल 221 कार्य स्वीकृत किए गए थे। प्रत्येक कार्य की लागत लगभग 31 लाख 18 हजार रुपये निर्धारित की गई थी। आरोप है कि पंचायत स्तर से लेकर उप अभियंता, सहायक अभियंता, कार्यपालन अभियंता तथा कार्यक्रम अधिकारी तक की मिलीभगत से मजदूरों के हित में बनी इस योजना को कथित तौर पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया गया।
कई चेक डैम निर्माण के कुछ समय बाद ही टूट गए…
स्थलीय निरीक्षण के दौरान कई ग्राम पंचायतों में ऐसे चेक डैम मिले, जो निर्माण के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त अथवा पूरी तरह टूट गए। आरोप है कि गुणवत्ता में कमी सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों से न तो क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत कराई और न ही निर्माण की राशि की रिकवरी अथवा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई की। यदि निर्माण कार्यों का समय पर तकनीकी परीक्षण कराया जाता और दोषी एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई होती, तो करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि का नुकसान रोका जा सकता था।
जल संरक्षण का उद्देश्य अधूरा पड़ता दिख रहा…
इन चेक डैमों का निर्माण वर्षा जल का संरक्षण, भूजल स्तर बनाए रखने तथा किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन कई स्थानों पर चेक डैम टूटे होने, पानी का पर्याप्त संचयन नहीं होने तथा समय पर रखरखाव नहीं किए जाने से योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। निरीक्षण के दौरान कई चेक डैमों में भारी मात्रा में मलबा जमा मिला। आरोप है कि नियमित डीसीलटिंग का प्रावधान होने के बावजूद कई स्थानों पर वर्षों से सफाई नहीं कराई गई, जिससे जल संग्रहण क्षमता लगातार कम होती जा रही है।
रखरखाव के नाम पर भी उठ रहे सवाल…
निर्माण के बाद तीन वर्षों तक चेक डैमों के रखरखाव और समय-समय पर डीसीलटिंग के लिए भी अलग से राशि का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद अनेक स्थानों पर न तो वास्तविक सफाई कराई गई और न ही क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत हुई। इससे सरकारी धन के उपयोग और कार्यों की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
सामग्री आपूर्ति और भुगतान पर भी उठे सवाल…
पूरे मामले में सामग्री आपूर्ति को लेकर भी नए सवाल सामने आए हैं। मिडिया को उपलब्ध भुगतान संबंधी दस्तावेजों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कुछ फर्मों को निर्माण सामग्री की आपूर्ति के नाम पर भुगतान किया गया है, जिनमें रायपुर स्थित एक फर्म भी शामिल है। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब बलरामपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में सरिया, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री आसानी से उपलब्ध थी, तब इतनी दूर रायपुर से सामग्री मंगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी..? क्या स्थानीय स्तर के पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से सामग्री खरीदी नहीं जा सकती थी, अथवा इसके पीछे कोई अन्य कारण था..?
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिन फर्मों के नाम पर भुगतान हुआ, उनमें से कुछ के संचालक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन निर्माण कार्यों से जुड़े रहे। वहीं कुछ फर्मों के संबंध में यह दावा भी किया जा रहा है कि मौके पर उनका कोई व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित नहीं मिला। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो केवल कागजों में संचालित फर्मों के माध्यम से भुगतान किए जाने जैसी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
प्रदेश स्तरीय जांच से खुल सकते हैं कई राज…
मामला करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से जुड़ा है। इसलिए पूरे प्रकरण की तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर स्वतंत्र प्रदेश स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जांच होने पर निर्माण गुणवत्ता, सामग्री आपूर्ति, भुगतान प्रक्रिया, डीसीलटिंग, रखरखाव, फर्जी मस्टर रोल तथा अन्य संभावित अनियमितताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। राज्य सरकार और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
कलेक्टर ने कहा होगी जांच..
बलरामपुर – रामानुजगंज कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा उक्त कार्य आरईएस विभाग के हैं जांच कराई जाएगी।
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