अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के टैरिफ फैसले को मनमाना बताया, राष्ट्रपति के सामने खड़े हुए नए विकल्प

अदालत

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फेडरल अपील कोर्ट ने तगड़ा झटका दे दिया है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि राष्ट्रपति को हर देश पर व्यापक टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने माना कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इमरजेंसी पावर लॉ का अतिक्रमण किया है।

हालांकि कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ पर कोई रोक नहीं लगाई है। इससे अमेरिकी प्रशासन को मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने का समय मिल गया है। फेडरल अपील कोर्ट ने चीन, मेक्सिको और कनाडा समेत अप्रैल में अन्य देशों पर लगे टैरिफ पर यह फैसला दिया है। फेडरल कोर्ट ने 7-4 के फैसले में कहा ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस का इरादा राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार देने का था।

पिछले फैसले को लगभग बरकरार रखा

दरअसल अमेरिकी प्रशासन ने तर्क दिया था कि तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को टैरिफ के आपातकालीन उपयोग मंजूरी दी गई थी। लेकिन मई में न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा था कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ आपातकालीन शक्ति कानून के तहत राष्ट्रपति को दिए गए किसी भी अधिकार से अधिक हैं।

अब फेडरल अपीलीय अदालत ने भी उस फैसले को काफी हद तक बरकरार रखा। इस जजों के बीच की असहमति ने ट्रंप के लिए कुछ कानूनी रास्ते भी खोल दिए हैं। ट्रंप सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि अगर टैरिफ हटा दिया जाता है, तो उसे वसूले गए कुछ आयात वापस करने पड़ सकते हैं, जिससे अमेरिकी खजाने को आर्थिक नुकसान होगा।

ट्रंप ने कहा है कि वह इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर अदालत का फैसला मान लिया गया, तो यह अमेरिका को बर्बाद कर देगा। बता दें कि ट्रंप के टैरिफ के कारण कई देशों ने अमेरिका के साथ एकतरफा ट्रेड डील कर ली है। वहीं ऐसा नहीं करने वाले देशों पर ट्रंप ने जुर्माने के तौर पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया है।

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