Home छत्तीसगढ़कोटमी शहर के सड़क की हालत बद से बदतर… गड्ढों में फंसे वाहन, जलभराव और कीचड़ से हो रही जनजीवन असहनीय, पीडब्ल्यूडी विभाग पूरी तरह बेखबर

कोटमी शहर के सड़क की हालत बद से बदतर… गड्ढों में फंसे वाहन, जलभराव और कीचड़ से हो रही जनजीवन असहनीय, पीडब्ल्यूडी विभाग पूरी तरह बेखबर

by Sushmita Mishra
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सड़क

गौरेला पेंड्रा मरवाही, 16 सितंबर 2025 – पेंड्रा से कोरबा स्टेट हाइवे पर स्थित कोटमी शहर की सड़क की बदहाली ने आमजनता का जीना हराम कर दिया है। इस मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जो बारिश के पानी से भर गए हैं। कीचड़, पानी के कुंड और टूट-फूट ने इस सड़क को पूरी तरह से अव्यवस्थित बना दिया है। वाहन चालक हर दिन मौत के खतरे से जूझते हुए इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क की यह खस्ताहाल स्थिति वर्षों से चली आ रही है। बड़े-बड़े गड्ढे इस हद तक गहराए हैं कि छोटे-मोटे वाहन फंस जाते हैं, तो बड़े वाहन भी जाम हो जाते हैं। ऐसे में चलना तो दूर, केवल इस मार्ग के बारे में सोचते ही रूह कांप जाती है। कभी-कभी तो वाहन चालक गड्ढों के बीच फंसने से दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। कई बार मृत्युदर सड़क पर घटित हो चुकी है, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग व स्थानीय प्रशासन ने सुध लेने की जहमत नहीं उठाई।

गौरतलब है कि इस मार्ग से कई वीआईपी, मंत्री और अधिकारी सायरन बजाकर फर्राटे से निकलते हैं। इसके बावजूद न तो सड़क की मरम्मत हो रही है और न ही नियमित रूप से मेंटेनेंस। हर बार मेंटेनेंस के नाम पर भारी-भरकम बजट पास होता है, लेकिन उसके बदले जनता को गड्ढों, कीचड़ और पानी के कुंड ही मिलते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्य केवल ठेकेदारी का खेल बन चुका है, जिसमें करोड़ों रुपये का बंदरबांट होता है, लेकिन जनता की सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता।
स्थानीय निवासी आशुतोष ने कहा, “इस मार्ग से गुजरना हर दिन एक डर बन गया है। कई बार तो छोटे बच्चे व बुजुर्ग गिरकर घायल हो चुके हैं। बार-बार विभाग से शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।”
जनता का कहना है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के शासनकाल में मार्ग की हालत कुछ हद तक सुधरी थी, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार में हालत और भी बदतर हो गई है। पानी-पानी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी बेकार हो चुकी हैं। जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या यह कुशासन है या सुशासन?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तत्काल मरम्मत का कार्य नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में और ज्यादा जानमाल का नुकसान होगा। अधिकारी व मंत्री केवल सायरन बजाकर इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदारी से पूरी तरह मुँह मोड़ते हैं।

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