रायगढ़ से वेल्लोर तक उपचार की राह, जन चेतना मंच और भूमिबंधु संस्था ने बढ़ाया हौसला,
पुसौर झलमला निवासी प्रोफेसर स्व बल के सुपुत्र बने सेतु और किया आश्वस्त नहीं होने देंगे कोई कमी,
रायगढ़। दुर्लभ और गंभीर बीमारी मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी से जूझ रहे दो बच्चों और उनके परिजनों के लिए एक संवेदनशील सामाजिक पहल ने उम्मीद की नई किरण जगा दी है। जन चेतना मंच के राजेश त्रिपाठी, भूमिबंधु सामाजिक संस्था की संचालिका सविता रथ और सामाजिक कार्यकर्ता पद्मनाभ प्रधान के संयुक्त प्रयासों से दोनों बच्चों को बेहतर उपचार के लिए वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) पहुंचाया गया, जहां उनका गहन परीक्षण और विशेषज्ञों की निगरानी में जांच कराई गई।
रायगढ़ के ऋषभ हंसराज और ग्राम सूपा के सालोम अहिरवार जैसे मासूम जो लंबे समय से इस जटिल बीमारी से संघर्ष कर रहे हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल इलाज नहीं बल्कि जीवन में नई आशा लेकर आई। 12 से 17 मार्च 2026 तक छह दिनों तक चली विस्तृत जांच प्रक्रिया में बच्चों के परिजन हेमंत हंसराज और श्याम अहिरवार के लिए किसी फरिश्ते की मदद से कम नहीं रही इन्हीं सबने विपरीत परिस्थितियों में जूझने की हिम्मत मिली।
वेल्लोर में सीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्षजीत बल से मुलाकात इस पूरे प्रयास का अहम पड़ाव साबित हुई। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के उपचार हेतु गठित विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के सदस्य डॉ. बल ने न केवल बच्चों की जांच कराई, बल्कि परिजनों को यह भरोसा भी दिलाया कि ऐसे मरीजों के लिए हरसंभव बेहतर इलाज और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें कि डॉ. हर्षजीत बल पुसौर झलमला के प्रतिष्ठित निवासी प्रोफेसर स्व डॉ डी. एस. बल के छोटे सुपुत्र और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री मनजीत कौर बल के भाई निकले। खासबात ये है डॉ हर्षजीत बल सीएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर शिशु रोग विशेषज्ञ के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे है दूसरी खास बात ये है डॉक्टर बल मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी जटिल बीमारी के लिए इस मेडिकल कॉलेज में बनी 12 डॉक्टरों की टीम में वह भी शामिल है।
ज्ञात हो कि मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी एक ऐसी बीमारी है, जिसका पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय पर सही उपचार, स्टेरॉयड, फिजियोथेरेपी और आधुनिक उपकरणों की मदद से मरीज की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ताओं की यह पहल उन परिवारों के लिए संबल बनी है, जो आर्थिक और मानसिक रूप से टूटने की कगार पर थे। इस पूरे प्रयास ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशील समाज और समर्पित लोगों की पहल से असंभव भी संभव की दिशा में बढ़ सकता है। बच्चों के परिजनों के लिए यह मदद केवल इलाज तक सीमित नहीं रही बल्कि टूटते हौसलों के बीच एक नई मजबूती और जीने का विश्वास भी दे गई।
इस बीमारी को ठीक तो किया नहीं जा सकता है अलबत्ता इसके सही इलाज से बहुत हद तक स्वस्थ रह सकते है। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी की बीमारी में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा इसके विशेष उपकरणों से स्टेरॉयड फिजियोथेरेपी और इलाज के माध्यम से मांसपेशियों की कमजोर करने वाली कड़ी को रोकने से मरीज काफी हद तक ठीक रह सकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर सीएमसी वेल्लोर में जो मिला यही मरीज के परिजनों में टूटते हौसलों के बीच मजबूती प्रदान किया है।
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