
छत्तीसगढ़ सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री टंक राम वर्मा जी द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की गोली मारकर हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को “देशभक्त” कहना न केवल अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह भारत की आत्मा, संविधान और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों पर सीधा हमला है।*
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे भारत की चेतना, विचार और नैतिक शक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने अहिंसा, सत्य, सत्याग्रह और सर्वधर्म समभाव के रास्ते पर चलकर भारत को आज़ादी दिलाई। बिना हथियार उठाए, बिना हिंसा किए उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को घुटनों पर ला दिया।*
चंपारण सत्याग्रह, दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों के माध्यम से गांधी जी ने करोड़ों भारतीयों को आज़ादी की लड़ाई से जोड़ा।*
*महात्मा गांधी जी ने आज़ादी के बाद भी देश को जोड़ने, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और संविधान की भावना के अनुरूप भारत निर्माण का कार्य किया। वे चाहते थे कि भारत एक ऐसा राष्ट्र बने जहाँ
सभी धर्मों का सम्मान हो*
कमजोर, गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग को न्याय मिले*
सत्ता नैतिकता और सत्य पर आधारित हो*
आज हम जिस भारतीय संविधान पर गर्व करते हैं, उसकी आत्मा में गांधी जी के विचार स्पष्ट रूप से झलकते हैं। संविधान हमें अहिंसा, भाईचारे, समानता और कानून के शासन का रास्ता दिखाता है।*
ऐसे में एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा एक सिद्ध हत्यारे को “देशभक्त” कहना न केवल नैतिक अपराध है, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का भी घोर उल्लंघन है। नाथूराम गोडसे ने देश की आत्मा पर गोली चलाई थी। किसी भी सभ्य, लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश में एक हत्यारे का महिमामंडन स्वीकार्य नहीं हो सकता।*
यह बयान केवल महात्मा गांधी जी का अपमान नहीं है, बल्कि यह देश की आज़ादी, संविधान, लोकतंत्र और शहीदों के बलिदान का अपमान है।*
ऐसे बयान समाज में नफरत,विभाजन और हिंसा को बढ़ावा देते हैं, जो भारत की एकता के लिए घातक हैं।*
*हम इस बयान की कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि*
*संबंधित मंत्री अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें*
*सरकार स्पष्ट करे कि वह गांधी जी और संविधान के मूल्यों के साथ खड़ी है*
*भारत गांधी का देश है, गोडसे की सोच का नहीं।*
*गांधी जी के विचार ही इस देश को जोड़ते हैं, आगे बढ़ाते हैं और मानवता का रास्ता दिखाते हैं।*
*महात्मा गांधी अमर हैं, उनके विचार अमर हैं।*
*हिंसा नहीं, अहिंसा ही भारत की पहचान है।*
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