बेंगलुरु की सड़कों पर बाइक टैक्सी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं, जब कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने इस पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने बाइक टैक्सी सर्विस को फिर से शुरू करने की कोई परमिशन नहीं दी है, लेकिन साथ ही सरकार को निर्देश दिया कि जब तक इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक वह बाइक टैक्सी सवारियों और मालिकों को परेशान न करे।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कर्नाटक में सरकार ने बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद बाइक टैक्सी कंपनियों ने अदालत का रुख किया। उच्च न्यायालय ने कुछ समय पहले इन कंपनियों को अंतरिम राहत दी थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी सेवाएं फिर से शुरू कर दी थीं। लेकिन, सरकार का तर्क था कि अदालत ने उन्हें स्थायी अनुमति नहीं दी है, और इसलिए वे इन सेवाओं पर रोक लगा सकती है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
बेंगलुरु की सड़कों पर बाइक टैक्सी को लेकर बढ़ते विवाद के बाद, उच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक बाइक टैक्सी सवारियों और ड्राइवरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाए। अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने बाइक टैक्सी कंपनियों को स्थायी रूप से अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति नहीं दी है।
सरकार और कंपनियों के बीच की लड़ाई
सरकार का कहना है कि बाइक टैक्सी से यात्रियों की सुरक्षा को खतरा है और वे बिना किसी उचित लाइसेंस के काम कर रही हैं। वहीं, बाइक टैक्सी कंपनियां और उनके ड्राइवर तर्क देते हैं कि यह सेवा लाखों लोगों को रोजगार देती है और यह शहरी यातायात का एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है। यह विवाद अब अदालत में है और इसका अंतिम फैसला ही यह तय करेगा कि बेंगलुरु में बाइक टैक्सी का भविष्य क्या होगा।
यात्रियों को राहत
उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी से फिलहाल बाइक टैक्सी से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों और बाइक टैक्सी ड्राइवरों को राहत मिली है। वे अब बिना किसी डर के अपनी सेवाएं जारी रख सकते हैं, जब तक कि अदालत का अंतिम फैसला नहीं आता। यह मामला भारत के अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद चल रहा है।
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