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छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने दी अपनी चिकित्सकीय सेवाएं

by RM Mishra
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20 अक्टूबर वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे (विश्व अस्थिसुषिरता दिवस) पर स्वस्थ भारत समृद्ध भारत अभियान के अंतर्गत चलो आयुर्वेद की ओर मिशन के तहत आयुष मेडिकल एसोसिएशन लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट, आरोग्य भारती एवं विश्व हिंदू परीषद के संयुक्त तत्वाधान में पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय महानदी काम्प्लेक्स निहारिका कोरबा मे आयोजित सभी प्रकार के अस्थिगत वात रोगों हेतु विटामिन डी, कैल्शियम जांच, रक्त शर्करा जांच एवं आयुर्वेद,पंचकर्म, एक्युप्रेशर, योग,ग्रह चिकित्सा परामर्श एवं उपचार शिविर में 36 मरीज हुये लाभान्वित।

छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने दी अपनी चिकित्सकीय सेवाएं।

शिविर मे रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) की जांच निशुल्क करने के साथ शुगर की परीक्षित औषधि भी निशुल्क दी गई।

अस्थिगत वात रोगियों के लिये उपयोगी स्वास्थ्य पुस्तिका भी निशुल्क प्रदान की गई।

शारीरिक निष्क्रियता ऑस्टियोपोरोसिस का प्रमुख कारण- डॉ.नागेंद्र शर्मा।

20 अक्टूबर वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे (विश्व अस्थिसुषिरता दिवस) पर स्वस्थ भारत समृद्ध भारत अभियान के अंतर्गत चलो आयुर्वेद की ओर मिशन के तहत आयुष मेडिकल एसोसिएशन, लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट, आरोग्य भारती एवं विश्व हिंदू परीषद के संयुक्त तत्वाधान में पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय महानदी काम्प्लेक्स निहारिका कोरबा में आयोजित सभी प्रकार के अस्थिगत वात रोगों हेतु अस्थिगत वात रोगों हेतु विटामिन डी, कैल्शियम जांच, रक्त शर्करा जांच तथा आयुर्वेद, पंचकर्म, एक्युप्रेशर, योग, ग्रह चिकित्सा परामर्श एवं उपचार शिविर में 36 मरीज हुये लाभान्वित। शिविर मे विशेष रूप से अपनी चिकित्सकीय सेवायें प्रदान करने वाले छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की का आस्टियोपोरोसिस अर्थ है “छिद्रयुक्त हड्डी”। इस रोग में व्यक्ती की हड्डियां का कमजोर हो जाती हैं और उनका अस्थि घनत्व का कम हो जाता है। जिसके कारण जरा सा आघात लगने पर, मामूली चोट लगने पर, गिरने पर, यहां तक की छींक आने के कारण भी हड्डियां टूट जाती है। इसे ही ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। जो कैल्शियम एवं विटामिन डी की कमी से होता है। जिसका प्रमुख कारण हमारी शारीरिक निष्क्रियता अर्थात लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि न करना या कम करनाहै । साथ ही हमारी खराब जीवन शैली, जंक फूड का सेवन, अत्यधिक शराब का सेवन एवं धूम्रपान भी इस रोग के होने का प्रमुख कारण है। इससे बचाव एवं उपचार हेतु नशे का त्याग कर अपनी दिनचर्या को नियमित करने के साथ साथ, यथाशक्ति शारीरिक श्रम करना चाहिये। साथ ही विटामिन डी की कमी की पूर्ति हेतु आतप स्नान करने एवं कैल्शियम की कमी की पूर्ति हेतु हल्का सुपाच्य आहार लेने तथा कैल्शियम युक्त भोज्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करने को कहा । साथ ही शिविर में विटामिन डी एवं कैल्शियम की जांच माइक्रो पैथो लैब द्वारा की गई। शिविर मे रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) की जांच निशुल्क करने के साथ शुगर की परीक्षित औषधि देने के साथ-साथ अस्थिगत वात रोगियों के लिये उपयोगी स्वास्थ्य पुस्तिका भी निशुल्क प्रदान की गई। शिविर में नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा के अलावा श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा, लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट के अध्यक्ष लायन शिव जायसवाल, संरक्षक लायन सुधीर सक्सेना, कोषाध्यक्ष लायन गजेंद्र राठौड, कार्यकारिणी सदस्य लायन नेत्रनन्दन साहू, लायन कमल धारीया, लायन अश्वनी बुनकर, पंचकर्म टैकनीशियन राजकुमार पटेल, पिंकी बरेठ, सुरभि कुंभकार, मनीष कौशिक, तोरेंद्र सिंह, महेंद्र साहू, देवबली कुंभकार, कमला कुंभकार, राजेश प्रजापति, राकेश इस्पात, सिद्धराम शाहनी, सिमरन जायसवाल, वीरेंद्र सोनी एवं बबलु सोनी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
फोटो-
1-मरीज की जांच करते नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र शर्मा।
2-मरीज को औषधि प्रदान करते नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र शर्मा

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