आज के समय में राजस्व कर्मचारी, पंचायत कर्मचारी, लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी , स्वास्थ यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी कुल मिलाकर सभी विभाग की कर्मचारी अपने आप को एलिट वर्ग का समझते हैं और इनमें उनके मध्य कोई जाति वैमनस्यता नहीं रहती यहां तक की धार्मिक वैमनस्यता भी नहीं है ।
यहां हम जनता हैं कि जाति और धर्म के नाम पर बटे हैं परंतु सच कहूं तो इन एलिट वर्ग के द्वारा ही बांटे गए हैं ।
और जो नेता बन गए हैं वह भी अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष नतमस्तक होकर कमीशन खोरी में अपने हिस्सेदारी का बंटवारा कर उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।
आज से 25 साल पहले तक कोई शिकायत जनता के द्वारा की जाती थी तो उसकी सच्चाई पूर्वक जांच होता था परंतु धीरे-धीरे यह व्यवस्था खत्म होते होते यह स्थिति आ गई है कि यदि किसी कर्मचारी पर भ्रष्टाचार का शिकायत किया जाए तो उच्च स्तर के अधिकारी उसे बचाने का पूर्ण प्रयास करते हैं।
इसीलिए जनता कोई शिकायत करना ही नहीं चाहता। यहां तक की सच्चाई पूर्वक यदि कोई पटवारी और चतुर्थ वर्ग कर्मचारी का भी शिकायत होता है तो उच्च अधिकारी पूर्णता बचाते हैं तब जनता कैसे शिकायत करना चाहेगी ।
अब जरूरत है एक एक उच्च आंदोलन की जो ( Gen G की तरह नही अपितु भारत देश में यह आंदोलन All in one G की तरह ) प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ हो जो सत्ताधारी पार्टियों में परिवारवाद के खिलाफ हो और पूर्ण जवाबदार सरकार निहित करने के समर्थन में हो और इसके लिए जरूरी है चापलूसों को छोड़कर निस्वार्थ भाव से जनता स्वस्थ आंदोलन के लिए अग्रेषित हो और ऐसा तंत्र स्थापित करें जिसमें कम से कम कर्मचारी अधिकारी वर्ग अपने आप को एलिट वर्ग का न समझे और नेता चुनने के बाद अपने आप को मालिक न होकर जनता का सेवक समझे ।
जय हिंद दोस्तों आशा है की जनता के दिमाग के कुछ हिस्से में मेरी बात को ग्रहण करने की क्षमता होगी ।
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