Home Uncategorized80 फर्जी हाथी मुआवजा प्रकरण, 50–70 लाख का खेल और सहकारी बैंक में करोड़ों की एफडी! पसान परिक्षेत्र में डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी पर गंभीर सवाल

80 फर्जी हाथी मुआवजा प्रकरण, 50–70 लाख का खेल और सहकारी बैंक में करोड़ों की एफडी! पसान परिक्षेत्र में डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी पर गंभीर सवाल

by RM Mishra
0 comments

कटघोरा/कोरबा – वनमंडल कटघोरा के पसान वन परिक्षेत्र से एक के बाद एक चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। हाथी से फसल नुकसान के नाम पर बनाए गए मुआवजा प्रकरणों में बड़े फर्जीवाड़े की चर्चा के बीच अब सहकारी बैंक में करोड़ों रुपये की फिक्स डिपॉजिट (FD) और खातों में भारी रकम जमा होने की बात सामने आने से पूरा मामला और गंभीर हो गया है। इन घटनाओं के केंद्र में डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी का नाम सामने आ रहा है, जिसको लेकर क्षेत्र में सवालों का तूफान खड़ा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार पसान परिक्षेत्र में हाथी से फसल और संपत्ति नुकसान के नाम पर 80 से अधिक मुआवजा प्रकरण तैयार किए गए। आरोप है कि इन प्रकरणों के जरिए करीब 50 से 70 लाख रुपये तक के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं की गईं। कई मामलों में कथित तौर पर बिना सही स्थलीय जांच के ही नुकसान दिखाकर मुआवजा प्रकरण तैयार कर दिए गए, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इन प्रकरणों को तैयार करने और आगे बढ़ाने की प्रक्रिया डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी के सर्किल में हुई, जिसके कारण उनकी भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि इन प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो फर्जी मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा हो सकता है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई कि अयोध्या प्रसाद सोनी द्वारा अपनी पत्नी और बच्चों के नाम पर सहकारी मर्यादित बैंक में करोड़ों रुपये की एफडी और खातों में भारी रकम जमा कर रखी गई है। लोगों का सवाल है कि यदि यह जानकारी सही है तो इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या है।

स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि एक तरफ हाथी मुआवजा प्रकरणों में लाखों रुपये के फर्जीवाड़े के आरोप और दूसरी तरफ बैंक में करोड़ों रुपये की जमा राशि पूरे मामले को बेहद संदिग्ध बनाती है। इसलिए अब इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

हालांकि इन सभी आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही संबंधित अधिकारी की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने आई है। लेकिन लगातार सामने आ रही जानकारियों के बाद क्षेत्र में यह मामला वन विभाग के संभावित बड़े घोटाले के रूप में चर्चा का विषय बन गया है।

अब लोगों की नजर प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा

Get real time update about this post category directly on your device, subscribe now.

You may also like

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?
-
00:00
00:00
Update Required Flash plugin
-
00:00
00:00